बर्फ़ के होते हैं 421 नाम, बर्फ़ से जुड़ी 17 दिलचस्प बातें

आप बर्फ़ से खेलना पसंद करते हों या फिर बर्फ़ीली सर्दियों में रज़ाई के भीतर छुपने को तरज़ीह देते हों.

लेकिन, बर्फ़ को लेकर आप की तमाम कल्पनाओं के बीच हम आपको इससे जुड़ी 17 दिलचस्प बातें बताते हैं

बर्फ़ सफ़ेद नहीं होती
चकरा गए न! भले ही आप क्रिसमस में सफ़ेद चादर में लिपटे हुए समां की कल्पना करते हैं, लेकिन हक़ीक़त यही है कि बर्फ़ सफ़ेद नहीं होती.

असल में ये क्रिस्टल की तरह होती है. इसके आर-पार रोशनी के गुज़रने की वजह से ही बर्फ़ सफ़ेद दिखती है.

बर्फ़ कई बार प्रदूषण, धुएं और हरी काई का रंग भी धर लेती है. हमने बर्फ़ को नारंगी से लेकर काले रंग में भी देखा है.

रह-तरह के हिमखंड
किसी भी बर्फ़ के टुकड़े का आकार कैसा होगा, ये बात हवा के तापमान पर निर्भर करती है.

हिम खंडों पर रिसर्च से ये बात सामने आई है कि जब तापमान -2 डिग्री सेल्सियस होता है, तो बर्फ़ जमती है.

इससे भी कम तापमान यानी माइनस 5 डिग्री सेल्सियस होने पर एकदम सपाट क्रिस्टल बनते हैं.

तापमान में और बदलाव होने पर जब हिमपात होता है, तो ये क्रिस्टल रोएंदार दिखने लगते हैं.

बर्फ़ के टुकड़ों का कैटलॉग
विज्ञान के ब्लॉग कंपाउंड इंटेरेस्ट के संस्थापक एंडी ब्रनिंग ने 35 अलग-अलग प्रकार के स्नोफ़्लेक यानी बर्फ़ के टुकड़ों का वर्णन किया है.

इसके अलावा भी कई तरह के हिमखंड देखने को मिलते हैं. वो बडे घनाकर टुकड़ों से लेकर पंखे जैसे पतले आकार तक में मिलते हैं.

एक छोटे से केंद्र से बनता है हिमखंड
जिस तरह किसी कोशिका का न्यूक्लियाई यानी केंद्र होता है, बर्फ़ का ठीक वैसा तो नहीं होता, मगर उससे कुछ-कुछ मिलता ज़रूर होता है.

बर्फ़ अक्सर किसी एक चीज़ के इर्द-गिर्द इकट्ठा होकर जमने लगती है. बर्फ़ के गोले, किसी ओले से अलग होते हैं.

बर्फ़ीले पानी में पाप धोते लोग
हिमखंड बड़े होते जाते हैं
हम पिछले कई दशकों से ऐसे क़िस्से सुनते आए हैं कि कई जगहों पर 15 इंच तक के बड़े बर्फ़ के गोले गिरे. बहुत से लोगों ने ऐसे दावों पर शक ज़ाहिर किया है.

अब वैज्ञानिकों का कहना है कि बर्फ़ के गोलों को इतना बड़ा होने में कोई बाधा नहीं है. सर्द हवा के झोंके बर्फ़ को जमा कर इसका आकार बड़ा कर सकते हैं.

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