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Showing posts from March, 2019

झारखंड पुलिस की हिरासत में तीन घंटे रहे ज्यां द्रेज

मशहूर सोशल एक्टिविस्ट ज्यां द्रेज को झारखंड के गढ़वा में पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद छोड़ दिया. उनके साथ दो और लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया था. तब सुबह के दस बजे थे. गढ़वा जिले के बिशुनपुरा पोखरा चौक पर करीब 60-70 लोगों की भीड़ थी. वे मशहूर अर्थशास्त्री और सोशल एक्टिविस्ट ज्यां द्रेज से मिलने पहुंचे थे. इसके लिए 'राइट टू फूड' कैंपेन ने एक कार्यक्रम का आयोजन किया था. तभी झारखंड पुलिस ने वहां पहुंचकर ज्यां द्रेज और उनके साथियों को हिरासत में ले लिया. इस कारण उनकी मीटिंग नहीं हो सकी. पुलिस उन्हें लेकर बिशुनपुरा थाने पहुंची और करीब तीन घंटे की हिरासत के बाद दोपहर सवा एक बजे उन्हें रिहा कर दिया. उनके साथ हिरासत में लिए गए 'राइट टू फूड' कैंपेन के विवेक ने बताया कि हिरासत के दौरान पुलिस ने पहले तो कई धाराओं में एफ़आईआर की धमकी दी. बाद में एक बॉन्ड भरने को कहा गया. उस पर लिखा था कि उन्हें प्रशासन या पुलिस से कोई शिकायत नहीं है. ज्यां द्रेज ने ऐसा लिखकर देने से इनकार कर दिया. इसके कुछ देर बाद पुलिस ने हम लोगों को थाने से ही रिहा कर दिया. विवेक ने बीबीसी से ...

पीएम नरेंद्र मोदी: प्रशंसा की जगह उड़ सकता है मजाक, कहीं उल्टा न पड़ जाए दांव

लोकसभा चुनाव से पहले रिलीज हो रही नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म पीएम नरेंद्र मोदी का विषय ही ऐसा है कि हर कोई इस पर बात कर रहा है. फिल्म का ट्रेलर आ गया है. एक तबका कह रहा है कि फिल्म खासतौर से चुनाव में मोदी को फायदा पहुंचाने और प्रचार के लिए बनाई गई है. लेकिन 5 अप्रैल को रिलीज हो रही फिल्म, अगर ट्रेलर का ही विस्तार होगी तो इस बात की आशंका प्रबल है कि फिल्म, मोदी का प्रचार करने से कहीं ज्यादा उनका मजाक उड़ाने में इस्तेमाल हो. ऐसा घटनाओं की अतिनाटकीय प्रस्तुति की वजह से हो सकता है. मोदी को निर्भीक, निडर राष्ट्रवादी और हीरो के रूप में दिखाने के लिए जिस तरह से घटनाओं का वर्णन किया गया है वह ट्रेलर में प्रभावी लगने की बजाय मजाकिया नजर आता है. 1992 में बीजेपी ने कश्मीर के लाल चौक में तिरंगा एकता यात्रा निकालकर झंडा फहराया था. उस वक्त बीजेपी अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने यात्रा का नेतृत्व किया था . लेकिन "पीएम नरेंद्र मोदी" में इस घटना को बहुत ही नाटकीय तरीके से दिखाया गया है. यह कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोग लाल चौक पर तिरंगा फहराने जा रहे हैं. मोदी के ग्रुप को सेना...

लोकसभा चुनाव 2019- प्रियंका गांधी खुलकर सामने क्यों नहीं आ रहीं: नज़रिया

वो साल 2003 का पतझड़ था. अटल बिहारी वाजपेयी मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार कर रहे थे. बीजेपी ने ये तीनों ही चुनाव जीते थे. राजस्थान के रेगिस्तान में जब उन्होंने चुनावी सभा को संबोधित किया तो हवा में एक नमी सी थी. उन्होंने हवा की ख़ुशबू ली और अपना भाषण शुरू करते हुए कहा, " मौसम बदल रहा है." भीड़ को उनकी बात समझने में देर नहीं लगी और माहौल तालियों और ठहाकों से गूंज उठा. अहमदाबाद में मंगलवार 12 मार्च को जब कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक हुई तो हवा में कुछ वैसा ही अहसास था. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर अपना पहला भाषण दिया. सार्वजनिक बैठक में वो सिर्फ़ पांच-छह मिनट ही बोलीं. उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के मुद्दों, जैसे रफ़ाल घोटाला, बड़े व्यापारियों को दी गई मोदी सरकार की छूट आदि पर कोई टिप्पणी नहीं की. उन्होंने लोगों से उन सभी वादों को याद करने के लिए कहा जो पूरे नहीं किए गए और यह कहते हुए उन्होंने मोदी का नाम भी नहीं लिया. उन्होंने लोगों से कहा- सोचो और फ़ैसला करो. जो लोग तुम्हारे सामने ...

गंगा की साफ़ाई के दावे को पूरा कर पाई सरकार: रियलिटी चेक

जब नरेंद्र मोदी साल 2014 में भारत के प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने देश के नागरिकों से एक वायदा किया था. उन्होंने कहा था कि वो प्रदूषित गंगा नदी को साफ करने का काम करेंगे. साल 2015 में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार ने इसके लिए पांच साल का कार्यक्रम की शुरुआत की और 300 करोड़ रुपये भी रखे. जब नरेंद्र मोदी साल प्रधानमंत्री बने तब उन्होंने देश के नागरिकों से एक वायदा किया था. उन्होंने कहा था कि वो प्रदूषित गंगा नदी को साफ करने का काम करेंगे. बीते साल दिसंबर में मोदी ने अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी में एक रैली में कहा कि गंगा में प्रदूषण कम करने में सरकार को सफलता मिल रही है. लेकिन विपक्ष का ये दावा है कि सरकार इस मामले में अपना वादा पूरा नहीं कर पा रही है. हालांकि इस समस्या पर पहले से काफी अधिक धन खर्च किया जा रहा है, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं लगता 1,568 मील लंबी इस नदी को साल 2020 तक पूरी तरह साफ़ किया जा सकेगा भारत में हिंदु धर्म माने वाले गंगा को पवित्र नदी मानते हैं. ये नदी हिमालय में गंगोत्री से निकल कर वाराणसी से होती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है. पिछली सरकारों ने गंगा को साफ करने ...